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महिला और पुरुष में बांझपन के कारण, लक्षण, निदान और इलाज – Femail and male Infertility Causes symptoms diagnosis and teratment in hindi

बांझपन एक ऐसी  समस्या है जो केवल महिलाओं में ही पाई जाती है बांझपन की वजह से ना जाने कितनी महिलाओं के घर  उजड़ रहे है बांझपन को इसी लिए आज एक रोग के अलावा श्राप भी कहा जाता है इस लिए आज हम बांझपन के कारण और उनके समाधान के बारे में बात करेंगे तो चलिए जानते है बांझपन क्या है यह किस कारण से होता है और इसके समाधान क्या इलाज क्या है |

बांझपन क्या है  – What is infertility In Hindi

इंफर्टिलिटी चिकित्सक का मानना है कि यदि विवहा के एक साल बाद तक गर्भनिरोधक साधनों का प्रयोग किये बिना सामान्य रूप से शारीरिक संबंध बनाने और प्रयास करने के बावजूद महिला गर्भधारण नहीं कर सके, तो इस अवस्ता को ही बांझपन कहते है | पहले महिलाओं में बांझपन साठ प्रतिशत था और पुरुषों में चालीस प्रतिशत, पर इधर कुछ वर्षों से महिला और पुरुष दोनों में बांझपन की दर बराबर यानी पचास प्रतिशत हो गयी है |

पुरुषों में बांझपन के कारण – Reasons for Infertility in Men

बांझपन के लिए पति और पत्नी दोनों ही जिम्मेदार हो सकते है पुरुषों में बांझपन के प्रमुख कारण इस प्रकार है |

  • बचपन में मम्स, स्मॉल पॉक्स, सीरियल वायरल, हर्निया, हाइड्रोसिल, टीबी आदि होना |
  • शुक्राणुओ की रचना का विकृत होना, यह जन्मजात भी हो जाता है |
  • ऑपरेशन या खेलकूद आदि में अंडकोष पर आघात लगने के कारण उनमें शुक्राणु – ना बनना |
  • वीर्य में शुक्राणु का ना पाया जाना, बहुत कम होना या उनमें गति ना होना |
  • सुक्राणुवाहक नली का किसी इंफेक्शन के कारण बंद हो जाना |
  • शराब-सिगरेट के अधिक सेवन से मधुमेह  कारण शुक्राणु का कम बनना |

पुरूशो की तरह स्त्रियों में भी बांझपन के कुछ प्रमुख लक्षण है  – Women infertility In Hindi

  • लगभग बीस प्रतिशत महिलाओं में डिंबोत्सर्ग (ओव्युलेशन ) में गड़बड़ी पाई जाती है |
  • लगभग चालीस प्रतिशत महिलाओं में किन्हीं कारणों से फेलोपियन ट्यूब बंद या ख़राब हो जाती है |
  • कुछ शारीरिक बीमारियों जैसे मधुमेह, थाइराइड, अत्यधिक एनीमिया होने व हार्मोन असंतुलन से अंडाणु ना बनना |
  • गर्भपात के दौरान कुछ विकार आ जाना |
  • शरीर में प्रोलेक्टिन नामक का अधिक मात्रा में पाया जाता है |
  • दस प्रतिशत कारण ऐसे होते है, जब पति- पत्नी तंदरुस्त होते है | उनमें कोई कमी ना होने पर भी गर्भधान नहीं हो पाने को अनएक्सप्लेड इंफर्टिलिटी कहते है |

बांझपन का इलाज – Treatment of infertility

पति-पत्नी दोनों को ही इंफर्टिलिटी विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए | चिकित्सक केस हिस्ट्री देखकर उनकी भली-भांति जांच करते है | सबसे पहले परुष के वीर्य में शुक्राणु की संख्या की जांच करते हैं | माहवारी चक्र के अनुसार महिला को उनका ओव्युलेशन पीरियड बताया जाता है, जो आमतौर पर माहवीर आने से दो सप्ताह पूर्व का होता है | चिकित्सक खाने से लिए दवाए भी देते है और दंपती को हर दूसरे दिन संबंध बनाने की सलाह | संबंध बनाने के तुरंत बाद औरत को उठने तथा अपने प्रजनन अंगों को धोने के लिए मना किया जाता है | साथ ही लुब्रिकेशन का प्रयोग न करने की सलाह भी दी जाती है |

इन उपायों से भी दो-तीन महा में गर्भ नहीं ठहरता, तो बच्चेदानी और फेलोपियन टयूब का परीक्षण किया जाती है | बच्चेदानी से एक छोटा-सा टिश्यू निकाल कर अंडाशय में अंडाणु बनने की प्रक्रिया सामान्य होने की जांच करायी जाती है | डिंब बनने की प्रक्रिया कई हमोर्नो के समवित स्त्रव से होती है | यदि हार्मोन असंतुलित हैं, तो कृत्रिम हार्मोनों की सहायता से इलाज किया जाता है इसे इन्डक्शन ऑफ ओव्यूलेशन कहते है अकसर इस तरह के इलाज के दौरान महीनो के दसवें दिन से डिंब छूटने से पहले और बाद में पुरुष से संबंध बनाने की सलाह दी जाती है | इस तरह से इलाज का इंडक्शन ऑफ ओव्यूलेशन एंड टाइम्ड इंटरकोर्स कहते है |

सामान्य गर्भधारण के लिए फेलोपियन टृयूब का स्वस्थ होना भी बहुत जरूरी है | इसका पता एक तरह के विशेष एक्सरे तथा दूरवीन जांच से  चलता है | दूरबीन  विधि में एक विशेष प्रकार की नाली द्रारा एक विशेष रंगीन दवा गर्भशय में डाली जाती है | यह दवा गर्भशय तथा फेलोपियन ट्यूब से होती हुई उदर में पहुंच कर बिखर जाती है | फेलोपियन ट्यूब बंद होती है,तो दवा उदर तक नहीं पहुंच पाती है | इस एक्सरे से गर्भाशय का आकार तथा अन्य विकृतियों का भी पता चल जाता है | अगर ओवरीज में सिस्ट होती है | तो उसे भी निकल दिया जाता है |

अगर फेलोपियन ट्यूब बंद है, तो उनको खुलवाना ही एकमात्र उपचार है | पर कई बीमारियों जैसे- क्षय रोग, प्लूरिसी, एपिडसाइटिस ऑपरेशन आदि से ट्यूब बंद तथा खराब तक हो जाती है |

बांझपन दूर  करने के आयुर्वेदिक उपाय – Ayurvedic remedies to remove infertility

बांझपन कई कारणों से होता है, इसमें रक्त की कमी, जननेन्द्रियों की विकृति, डिम्बाशय विकृति आदि प्रमुख है बांझपन दूर करने के लिए इसके कारण का नष्ट होना आवश्यक है | इसके पश्चात भी सामान्य रहने पर भी गर्भ नहीं ठहरता तो रजोनिवृत्ति के बाद पांच माशा हाथी दांत का बुरादा दुध के साथ तीन दिन तक पीना चाहिये |

  • जायफल को कूट – छानकर बराबर शक्कर मिला ले, ऋतु स्नान के बाद तीन दिन तक 25 ग्राम प्रतिदिन दूध के साथ ले |
  • असगंध को कूट- पीसकर छान ले, ऋतु आरम्भ होने से पूर्व 7 दिन तक 6 माशा प्रतिदिन दूध के साथ सेवन करे |
  • निरंतर 21 दिन तक हथेली भर अजवाइन खाकर दूध पिने से गर्भ ठहरता है |
  • बिजौरे नीबू के बीज को पीसकर बछड़े वाली गाय के दूध के साथ पीने से गर्भ ठहरता है |

बांझपन दूर करने के होम्योपैथिक उपाय – Homeopathic Remedies For Improving Infertility

होम्योपैथ – मासिकधर्म की अनियमितता, श्वेत प्रदर, कब्ज आदि हो तो सीपिया 30 दिन में तीन बार | गर्भशय संबंधी विकार हो तो ऑरम म्यू 3 दिन में तीन बार, श्वेत प्रदर की अधिकता हो तो बोरोक्स 30 दिन में तीन बार | टांगों और हाथों में बाल हो और जननांगों में बदबू हो तो थूजा 200 दिन में एक बार प्रयोग करे |

हेल्लो दोस्तों  बांझपन के कारण और समाधान, का लेख कैसा लगा बताये और हमे कमेन्ट करे और अपने दोस्तों को शेयर करे |

 

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